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Wednesday, November 29, 2017

मोदी सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन से देश की सफाई या जनता के पैसो की सफाई

जी हाँ ! ये खबर पक्की है स्वच्छ भारत से भारत स्वच्छ हुआ हो या न हुआ हो, पर जब से मिशन शुरू हुआ है , प्रधानमंत्री की भाजपा सरकार ने अब तक 2 सालो में "स्वच्छ भारत मिशन " के प्रचार पर लगभग 530 करोड़ रुपये  खर्च कर लिए है।
स्वच्छ भारत मिशन
  • दरसल ये खुलासा हुआ है, सुचना के अधिकार(RTI) के अंतर्गत पूछे एक सवाल के जवाब में मिला है । जिसके अनुसार पिछले 2 वर्षो में मोदी सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत मीडिया प्रचार में करीब 530 करोड़ रुपये खर्च किये हैं ।
  • पिछली साल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन पर लगभग 350 करोड़ रुपये सिर्फ 2016 में खर्च किये ।यह पैसा स्वच्छ भारत मिशन के प्रचार में प्रयोग हुआ ।
  • स्वच्छ भारत मिशन में मोदी सरकार द्वारा, बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ मिशन से 15 गुना ज़्यादा पैसा खर्च हुआ है |बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ मिशन के प्रचार का बजट आधा कर स्वच्छ भारत मिशन का बजट बढ़ाया गया ।
                  आपके और हमारे दिए टैक्स के पैसो का कितना सही या गलत प्रयोग हुआ है । ये जनता से बेहतर कोई नहीं जानता ,पर उससे पहले कुछ और जानकारी जानना ज़रूरी है मोदी सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के बारे में ।

क्या है स्वच्छ भारत मिशन ?

स्वच्छ भारत मिशन मोदी सरकार द्वारा चलाया स्वच्छता प्रोग्राम है जो 2 अक्टूबर 2014 राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के जन्मदिन पर शुरू हुआ था ।
  • इसके अंतर्गत सरकार ने 2019 तक खुले में शौच खत्म करने का लक्ष्य रखा है | स्वच्छ भारत मिशन का लक्ष्य पूरे देश में 12 करोड़ शौचालय बनाना है ।
  • दूसरा लक्ष्य है देश के गली मोहल्लो, सड़को की साफ़ सफाई करना ।
  • इसके अंतर्गत सरकार ने बेकार सामग्री का निवारण ,दरवाज़े से कूड़ा करकट इक्क्ठा कर उसका सही प्रयोग करना लक्ष्य है ।

हमारे दिए टैक्स पैसो को कितना खर्च किया स्वच्छ भारत मिशन पर ?

जनता के दिए टैक्स के पैसो को अब तक मोदी सरकार ने कई प्रोग्राम के अंदर खर्च किया है । 2017-18 के बजट के अनुसार, वित्तमंत्री अरुण जेटली ने स्वच्छ भारत मिशन के लिए लगभग 16 करोड़ रुपये आवंटित किये हैं , जो पिछले वित्त वर्ष के आवंटित बजट से कंही ज़्यादा है । 2016-17 में आवंटित राशि लगभग 9000करोड़ रुपये थी ।
जबकि स्वच्छ भारत पोर्टल के अनुसार वित्त वर्ष  2014-15 में उन्हें 859 करोड़ रुपये ,2015-16 में लगभग 11000 करोड़ रुपये और 2016-17 में  2100 करोड़ रुपये मिले ।

RTI के जवाब के मुताबिक जो पैसा प्रचार में खर्च हुआ है, वो स्वछता के प्रति लोगो को जागरूक करने के साथ साथ , म्युनिसिपल अधिकारियो को भी जागरूक करना है , इसके साथ साथ खुले में शौच न करने के फायदों से लोगो को अवगत करना है ।

"स्वच्छ भारत मिशन " की जमीनी हक़ीक़त ??

"स्वच्छ भारत मिशन " की जमीनी हक़ीक़त जानना हम लोगो के लिए जानना बहुत ज़रूरी है क्यूंकि ये जो भी पैसा खर्च हो रहा है ये आम आदमी की जेब से टैक्स के रूप में सरकार को दिया जाता है ।
- सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत बनाये जा रहे। शौचालयों में ज़रूरी स्वछता की ज़रूरतों को छोड़ सिर्फ संख्या पर ध्यान दिया है । अभी तक इस प्रोग्राम के अंतर्गत लगभग 22 लाख शौचालय बनाये जा चुके है ।
- सर्वे के मुताबिक 
बनाये गए शौचलयों में लगभग 61% शौचलयों में पानी की व्यवस्था नहीं है , और लगभग चालीस प्रतिशत में पानी के निकास की सुविधा नहीं है, जो कि पर्यावरण के लिए भी खतरा हो सकती है । 
- - लोगो को जागरूक करना सबसे ज़रूरी कार्य है, पर पूरे बजट का सिर्फ 1 % बजट ही लोगो को जागरूक करने पर खर्च किआ जाता है ।
- ये सिर्फ मोदी सरकार के एक प्रोग्राम का हाल नहीं है , ऐसे ही दूसरे प्रोग्राम "नमामि गंगे" में भी सिर्फ पैसो का दुरूपयोग हुआ है । उमा भारती को नमामि गंगे मंत्रालय दिया गया जिसके अंतर्गत गंगा की सफाई का लक्ष्य रखा गया था। इस मिशन को मोदी सरकार का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट कहा जा रहा था , जिसकी सफलता सरकार के लिए सबसे बड़ा मील का पत्थर हो सकता है 
किन्तु हुआ इसके एकदम विपरीत

आइये जानते है नमामि गंगे का हाल

NGT द्वारा दी गए लगभग 500 पन्नो की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है की, नमामि गंगे प्रोजेक्ट पर दो सालो में लगभग 7000 करोड़ रुपये खर्च किये गए , पर इससे कोई सार्थक सुधार नहीं हो पाया है ।
- गंगा को उत्तर भारत की जीवनदायनी नदी कहा जाता है ।
- दुर्भाग्यवश गंगा दुनिया की पांचवी सबसे प्रदूषित नदी है ।
- गंगा को हिन्दू धर्म में माँ कहा जाता है , और हर सरकार में उसकी सफाई के लिए खर्च के बाद भी सिर्फ खानापूर्ति बहुत ही शर्मनाक और निंदनीय है ।

स्वच्छ भारत मिशन और नमामि गंगे में सफाई तो नहीं हुई पर ये ज़रूर है के, सफाई के नाम पर जनता द्वारा दिए पैसो की अच्छे से सफाई की गयी है ।
      अब ये जनता को सोचना होगा के कब तक हम सफाई के नाम पर इतना पैसा सरकारों को खर्च करने देंगे , और कब तक ये मंत्रालय सफाई और मिशनों के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करते रहेंगे ।

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