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Wednesday, November 29, 2017

भारत के खतरनाक डाकू जिनसे कांपती थी पुलिस भी | डाकू या फ़रिश्ते

डाकू है या फ़रिश्ते ये आप तय करना जब आप भारत के सबसे खतरनाक डाकुओं के बारे में जानोगे जिनसे न सिर्फ आम लोग बल्कि पुलिस भी थर थर कांपते थे ।
"कालीया कितने आदमी थे" इस डायलॉग को सुन के आपको डाकू शब्द ध्यान में आता होगा , आज के समय में डाकू शब्द सिर्फ फिल्मो में ही सुनने को मिलता है , पर ऐसा नहीं है के ये सिर्फ काल्पनिक चित्रण है ।
डाकू सिर्फ फिल्मो में नहीं अपितु असल ज़िंदगी में भी होते थे , और इतने खतरनाक जिनसे आम लोग ही नहीं बल्कि पुलिस वाले भी कांपते थे ।
कभी ऐसा समय भी हुआ करता था, जब अलग-अलग जगहों में डाकुओं का छात्र राज्य चला करता था। इन डाकूओं का डर हमेशा लोगों के दिलों में बना रहता था । ये अलग अलग तरह के अपराधों को अंजाम देते थे ।

बाबा बकचोद का ज्ञान

"हत्या, अपहरण करके जो डाकू बना वीरपन्न वो कहलाया था , अत्याचरो से तंग आकर फूलन ने शस्त्र उठाया था। अच्छे कर्म करके मान सिंह और सुल्ताना गरीबो का मसीहा कहलाया था, क्या बाबा बकचोद के इलावा आपको किसी ने ये सुनाया था ???"



 ऐसे ही कुछ डाकुओ की कहानी और नाम यंहा दिए गए है ।

  • वीरपन्न डाकू 

वीरप्पन दक्षिण भारत का एक मशहूर डाकू था। उसने चन्दन की लकडियो की तस्करी से लेकर हाथी के दांत तक की तस्करी की। उसने मात्र 17 साल की उम्र में मर्डर जैसा अपराध किया। 1972 में उसे पहली बार गिरफ्तार किया गया।
  • विरपन्न अक्सर जंगल विभाग के अधिकारियो को मौत के घाट उतरता था।
  • या फिर उन लोगो को जो खुफिया जानकारी का आदान प्रदान करते थे।
  • 1987 में वीरप्पन ने एक फारेस्ट ऑफिसर चिंदम्बरम, तमिलनाडु को किडनैप कर उनका मर्डर भी कर दिया था।
  • 1991 में उसने आईएफएस अधिकारी पन्दील्लापल्ली श्रीनिवास को मार डाला।
  • अगस्त 1992 में वरिष्ट आईपीएस अधिकारी हरिकृष्णा पर आक्रमण भी किया था।
2004 में उसे मौत के घाट उतर दिया गया , पर उसने तमिलनाडु, केरल से लेकर कर्नाटक तक आतंक मच रखा था।

  • डाकू मानसिंह

अमीरों का पैसा लूटना और गरीबो में पैसे बांटना। एक ऐसा डाकू जिसे उसकी हरकतों के कारण "रॉबिनहुड" कहा जाता था। डाकू मानसिंह का जन्म आगरा में हुआ था ।
  • डाकू मानसिंह ने हमेशा सिर्फ अमीरों को लूटा ।
  • उसने कभी महिलाओ, बच्चो और विधवाओ पर अत्याचार नहीं किया।
  • 1955 में उसे एक एनकाउंटर में मार दिया गया ।
डाकू मान सिंह के बारे में कहा जाता है के उसने गरीबो , जरुरतमंदो और औरतो पर कभी भी अत्याचार नहीं किया ।

  • निर्भय सिंह गुज्जर 

निर्भय सिंह गुज्जर  चंबल का आखिरी बड़े डाकुओ में से एक था , उसके दर को इसी बात से जाना जा सकता है के उसके फरमान से ही सरपंच, विधायक और सांसद चुने जाते थे ।
करीब डेढ़ दशक तक उसने बीहड़ में राज़ किया । निर्भय सिंह गुज्जर का राजनेताओ से भी सीधा सम्पर्क था और वो उनके इशारे पर डकैती, अपहरण और हत्या जैसे संगीन मामलो को अंजाम देता था । 

  • इसके गट के पास AK-47 जैसी बंदूके भी होती थी ।
  • गुज्जर के गट में करीब 80 सदस्य थे  । 
  • इनके गट के पास बुलेट प्रूफ जैकेट्स, दूरबीन, मोबाइल इतियादी हुआ करते थे ।
  • निर्भय सिंह के समाजवादी सरकार से अच्छे रिश्ते माने जाते थे, एक बार उसने शिवपाल को अपना बड़ा भाई कहा था ।
  • निर्भय सिंह ने एक गाँव के जनप्रतिनिधि की नाक काट दी थी , क्यूंकि उसने चुनाव लड़ा था और स्कूल बनाने के लिए जमीन दी थी ।
एसटीएफ ने 2005 में निर्भय सिंह गुज्जर को मार गिराया ।

  • सुल्ताना डाकू 

अपने दोस्त मान सिंह की तरह ही डाकू सुल्ताना को भी गरीबो का मसीहा कहा जाता था । कहा जाता है सुल्ताना महज 17 साल की उम्र में अंग्रेज अफसरों के अत्याचार से डाकू बना और 40 साल की उम्र तक सक्रिय रहा।
  • उनके सामने किसी की सर उठाने की हिम्माक्त नहीं होती थी ।
  • डाकू सुल्ताना ने हमेशा अमीरो को लूटकर गरीबो की मदद की ।
  • उसने भी अपने दोस्त डाकू मान सिंह की तरह किसी महिला, बच्चे और अबला पर कभी अत्याचार नहीं किया।
  • सुल्ताना नजीबाबाद के  एक किले में रहता था, जिसके कारण किले का नाम  सुल्ताना का किला पड़ गया था।
सुल्ताना ने अकेले पूरी ब्रिटिश शासन व्यवस्था को हिला के रख दिया था । सुल्ताना को नजीबाबाद में ब्रिटिश सरकारने फांसी पर चढ़ा दिया ।

  • फूलन देवी 

फूलन देवी एक ऐसी खतरनाक महिला डाकू थी जिसने सिस्टम के खिलाफ बंदूक उठाई । फूलन देवी की कहानी को कई फिल्मो के जरिये चित्रित किया जा चूका है । फूलन देवी 1980 के दशक में चम्बल की सबसे खतरनाक डाकू थी ।

  • दरसल फूलन देवी का उनकी बिरादरी के लोगो ने कई बार बलात्कार किया ।
  • उनके साथ कई बार मारपीट भी की गयी ।
  • 1981 को बहमई में 22 ठाकुरों की हत्या कर दी थी जिन्होंने उसका सामूहिक बलात्कार किया था ।
  • फूलन देवी ने 1983 में आत्मसमर्पण किया और 1994 तक जेल में रहीं।
  • समाजवादी पार्टी के टिकट पर फूलन देवी ने चुनाव लड़ा और मिर्ज़ापुर से सांसद चुनी गयी ।
  • हालांकि 1998 में चुनाव हर गयी , लेकिन 1999 में वो फिर सांसद के रूप में चुनी गयी ।
25 जुलाई 2001 को उनकी हत्या कर दी गई और उसी के साथ एक डाकू से सांसद बनी डाकू फूलन देवी का सफर खत्म हो गया ।

         इन सब डाकुओ के बारे में ये तो स्पष्ट है के इनमे से कुछ मजबूरी में , कुछ गरीबो की मदद को तो कुछ सिर्फ खौफ पैदा करने को डाकू बने । आज भले ही डाकू शब्द हमें सुनने को नहीं मिलता, न ही हमें वो खौफ देखने को मिलता है जो इन डाकुओ के कारण हुआ करता था । आज भले ही हम ऐसे डाकुओ से न घिरे हो जो चेहरे से डाकू लगते है , परन्तु ऐसे लोगो से जरूर घिरी है जो चेहरे से शरीफ और कर्मो से इन डाकुओ से बत्तर है।
हमें ऐसे लोगो को पहचानने की ज़रूरत है और उनको अपने समाज से दूर करने की ज़रूरत है ।

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