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Wednesday, December 20, 2017

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हिमाचल चुनाव में अपने ही नेता के कारण जीतकर भी हारी बीजेपी। जानिये कैसे ?

हिमाचल और गुजरात विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज की। पूरे देश का ध्यान गुजरात विधानसभा चुनाव पर था, लेकिन सबसे रोचक खबर आई देवभूमि हिमाचल प्रदेश से जंहा प्रधानमंत्री मोदी और राजनीती के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह की रणनीति असफल हो गयी ।
हालांकि चुनाव तो बीजेपी जीत गयी ,लेकिन उनके अपने ही नेताओं की ऐसी हार हुई जिसके बाद जीतकर भी बीजेपी हार गयी ।
जानिये हिमाचल प्रदेश में भाजपा का जीतकर भी हारने के कारण ।
बाबा बकचोद का ज्ञान
जनता के प्रकोप से कौन आज तक बच पाया है,
सुजानपुर वालो ने धूमल को ये सबक सिखाया है ।
भावी CM की जगह राजिंदर राणा जिताया है ,
मज़ा किरकरा कैसे करती है जनता , क्या अब समझ आया है ???
धूमिल हुए धूमल

मुख्यमंत्री पद उमीदवार हारा ।

ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है , के जो पार्टी जीती उसी पार्टी का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार हार जाए । जी हाँ, हम बात कर रहे हैं बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल की ।
प्रेम कुमार धूमल इस चुनाव से पहले दो बार प्रदेश मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता रह चुके हैं ।
प्रेम कुमार धूमल को चुनाव से पहले ही , भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बीजेपी का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया था। लेकिन ये दांव बीजेपी को उल्टा पद गया और मुख्मंत्री पद का उम्मीदवार पार्टी के जीतने के बावजूद हार गया । इस हार के साथ ही सांसद अनुराग ठाकुर के पिता और 2 बार के पूर्व मुख्यमंत्री प्रोफ्फेसर प्रेम कुमार धूमल का राजनितिक जीवन खत्म होने की कगार पर है ।

धूमल की हार का कारण ?

प्रेम कुमार धूमल को हराने वाले नेता का नाम है राजिंदर राणा । ये कहा जा सकता है के धूमल को एक युवा नेता राजिंदर राणा ने हरा दिया पर इसके पीछे सिर्फ एक कारण नहीं है अपितु कई कारण है ।
आइये जानते हैं, ऐसे ही कुछ कारणों को विस्तार से ।
- दो खेमो में बंटा दल
जीत के बाद अक्सर ऐसी बातें सामने नहीं आती परन्तु हिमाचल बीजेपी हमेशा से ही दो खेमो में बनती हुई है । इसमें एक खेमा प्रेम कुमार धूमल तो वन्ही दूसरा जे प़ी नडडा का है। जे पी नडडा से पहले ये गुट पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद शांता कुमार के समर्थन से काम करता था। ये गुटबाजी को धूमल की हार का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है ।
- सीट का बदलना
केंद्र में अचूक पकड और अमित शाह से अच्छे सम्बन्धो की वजह से प्रेम कुमार धूमल को नडडा ने हमीरपुर सीट की बजाय सुजानपुर सीट से खड़ा कर दिया। प्रेम कुमार धूमल बहुत अच्छे से जानते थे की उनकी हार निश्चित है । परन्तु बेटे अनुराग ठाकुर और उनके गुट के नेताओ सतपाल सत्ती, सुरेश भ़ारद्वाज, राजीव बिंदल और नरेन्द्र बरागटा की वजह से उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बना दिया गया।
- राजिंदर राणा की लोकप्रियता
अनेक कांग्रेस शीर्ष नेताओ के हारने के बावजूद भी राजिंदर राणा मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के खिलाफ भी जीत गये ,इसमें उनकी लोकप्रियता सबसे अहम है। इसमें सबसे बड़ी बात यह है की राजिंदर राणा इससे पहले स्वतंत्र रूप से भी इस सीट से जीत चुके हैं।

कौन है राजिंदर राणा?

राजिंदर राणा के बारे में जानकार उन लोगो को आश्चर्य होगा जो उन्हें नही जानते ,क्यूंकि राजिंदर राणा वही शक्स है जो कुछ साल पहले तक भाजपा कार्यकर्ता और धूमल के ख़ास नेता हुआ करते थे। वह धूमल के पुरे चुनावी अभियान की अगुवाई करते थे। राजिंदर राणा की धूमल से अनबन के बाद वह पार्टी छोड़ स्वतंत्र लड़े और पिछले चुनाव में जीत गये। इस चुनाव में धूमल से टक्कर के लिए वह कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गये।

किन नेताओं ने किया बीजेपी की जीत का मजा किरकिरा ?

- सतपाल सत्ती
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और प्रेम कुमार धूमल के ख़ास नेताओ में से एक सतपाल सत्ती अपनी सीट नही बचा पाए। सत्ती उन्ना सीट से चुनाव में शामिल हुए और उन्हें हार का सामना करना पड़ा ।
- महेश्वर सिंह
कुल्लू के राजा और पूर्व सांसद महेश्वर सिंह भी अपनी सीट नही बचा पाए । महेश्वर सिंह कुछ समय पहले ही भाजपा में शामिल हुए थे। इससे पहले उन्होंने अपनी अलग पार्टी हिमाचल लोकहित पार्टी बनाई थी ।
- गुलाब सिंह ठाकुर
भाजपा के वरिष्ट नेता और कांग्रेस पार्टी के नेता कौल सिंह ठाकुर के समधी ठाकुर गुलाब सिंह भी अपनी सीट बचाने में असफल रहे । रोचक बात ये है के उनके समधी कौल सिंह और उनकी बेटी चंपा ठाकुर भी अपनीं सीट नहीं बचा पाए।

हालंकि इन नेताओ ने बीजेपी की जीत का मज़ा थोडा किरकिरा किया है , पर अब सभी को नए मुख्यमंत्री का इंतज़ार है। क्यूंकि इस चुनाव के साथ ही राजा वीरभद्र सिंह और प्रेम कुमार धूमल के राजनितिक युग का अंत हो गया है।
यह कहना भी रोचक होगा के वीरभद्र सिंह हारकर भी इस चुनाव में जीत गये , वन्ही प्रेम कुमार धूमल चुनाव में पार्टी के जीतने पर भी हार गये।

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